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Mathura News: वाइल्डलाइफ एसओएस ने शुरू किया ‘समर प्रोटोकॉल’; बचाए गए हाथियों और भालुओं का रखा जा रहा है ध्यान

by Tarun Bhardwaj • May 24, 2026
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यूनिक समय, मथुरा। उत्तर भारत में सूरज के तल्ख तेवरों के साथ ही तापमान में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों से जहां आम इंसान बेहाल है, वहीं मूक वन्यजीवों को भी इस तपिश से बचाने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। मथुरा स्थित कीठम और चुरमुरा के ‘हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र’ (Elephant Conservation and Care Centre) तथा ‘हाथी अस्पताल परिसर’ में बचाकर लाए गए हाथियों और भालुओं की सुरक्षा के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस (Wildlife SOS) संस्था ने अपने विशेष समर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल (Summer Management Protocol) को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है। इस विशेष प्रबंधन के तहत इन विशालकाय और संवेदनशील जानवरों को हाइड्रेट रखने तथा उन्हें गर्मी के तनाव से बचाने के लिए चौतरफा वैज्ञानिक उपाय किए जा रहे हैं।

डाइट में शामिल हुए तरबूज-खीरे

भीषण गर्मी में हाथियों के शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पशु चिकित्सकों की देखरेख में उनके खान-पान में बड़ा बदलाव किया गया है। हाथियों के दैनिक आहार में पानी से भरपूर और हाइड्रेटिंग मौसमी फलों, जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरे की मात्रा काफी बढ़ा दी गई है।

इसके साथ ही, केंद्र में मौजूद सुस्त भालुओं (Sloth Bears) को शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष रूप से तैयार ‘आइस पॉप्सिकल्स’ (Ice Popsicles) और जमे हुए फलों के बड़े ब्लॉक (Frozen Fruit Blocks) दिए जा रहे हैं। ये जमे हुए फल न केवल भालुओं को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं, बल्कि उनके शरीर के अंदरूनी तापमान को ठंडा रखने और उन्हें खेल-खेल में मानसिक रूप से व्यस्त रखने में भी बेहद मददगार साबित हो रहे हैं।

बाड़ों में लगे कूलर और स्प्रिंकलर

हाथियों और भालुओं के बाड़ों को ठंडा रखने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। सभी बाड़ों में हाई-स्पीड कूलर और ओवरहेड स्प्रिंकलर (पानी की बौछार करने वाले यंत्र) लगाए गए हैं। इसके अलावा, परिसर में बने विशाल पानी के पूलों का नियमित रखरखाव और सफाई की जा रही है, जहां हाथी दिन भर पानी में रहकर गर्मी से बहुत जरूरी और आरामदायक राहत पा रहे हैं।

पशु चिकित्सा टीम हाथियों को अतिरिक्त ओआरएस (ORS – ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्ट) का घोल और आवश्यक सप्लीमेंट्स दे रही है ताकि उनके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बना रहे। बाड़ों में दिन में कई बार पीने का साफ और ठंडा पानी बदला जाता है। धूप से बचाने के लिए मजबूत छायादार संरचनाएं बनाई गई हैं, और हाथियों के स्वभाव के अनुकूल मिट्टी के विशेष कीचड़दार गड्ढे (Mud Pits) तैयार किए गए हैं, क्योंकि मिट्टी का लेप हाथियों के शरीर के तापमान को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने और उनकी त्वचा को धूप से बचाने में मदद करता है।

दोपहर की तपिश से बचाने के लिए सुबह-शाम कराई जा रही सैर

गर्मी के मौसम में हाथियों की दिनचर्या में भी बड़ा वैज्ञानिक अनुकूलन (Adaptation) किया गया है। अब दोपहर की चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के दौरान हाथियों को पूरी तरह छायादार बाड़ों और पूलों में रखा जाता है। उनकी नियमित सैर (Walk) के समय को बदल दिया गया है; अब हाथी केवल दिन के सबसे ठंडे समय में ही सैर पर जाते हैं, यानी सुबह तड़के जल्दी और देर शाम को सूरज ढलने के बाद। इससे हाथी दोपहर की जानलेवा गर्मी की चपेट में आने से बच जाते हैं।

संस्था के आला अधिकारियों और डॉक्टरों ने क्या कहा?

बढ़ती गर्मी को देखते हुए वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि भारत में गर्मियां हर साल तेजी से बढ़ रही हैं और हमारी देखभाल में रह रहे ये बेजुबान जानवर भी इंसानों की तरह ही इस प्राकृतिक चुनौती का सामना कर रहे हैं, इसलिए हमारी ग्राउंड टीमें इन चुनौतियों का पहले से ही अनुमान लगाकर हर हाथी के स्वास्थ्य, हाइड्रेशन और खुशी के लिए जरूरी इंतजाम सुनिश्चित करती हैं।

संस्था की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने बताया कि उनके द्वारा लागू किए गए ग्रीष्मकालीन प्रोटोकॉल केवल शारीरिक राहत देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन्हें जानवरों की भावनात्मक, मानसिक और व्यवहारिक भलाई का समर्थन करने के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिसके चलते इस भीषण मौसम में भी हाथी पूलों में आरामदायक स्नान का भरपूर आनंद ले रहे हैं।

वहीं, पशु चिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक डॉ. इलियाराजा ने तकनीकी हस्तक्षेपों की जानकारी देते हुए कहा कि ओआरएस अनुपूरण, विशेष रूप से अनुकूलित आहार, ग्लूकोज और आवास को ठंडा रखना कुछ ऐसे मुख्य उपाय हैं जिन्हें गंभीरता से शुरू किया गया है, और मेडिकल टीम द्वारा हाथियों का निरंतर निरीक्षण व थर्मल स्कैनिंग की जा रही है ताकि हीट स्ट्रेस या थकान का कोई भी शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत प्रतिक्रिया की जा सके।

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